
रैरूमाखुर्द पुलिस ने हत्या के आरोपी युवक को भेजा जेल
रायगढ़, 3 जनवरी। जिले के रैरूमाखुर्द पुलिस चौकी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डिडवानारा में एक मामूली विवाद ने भयावह रूप ले लिया। एक सिरफिरे युवक ने अपने ही रिश्ते के बुजुर्ग पर इस कदर हमला कर दिया कि इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपी युवक को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
थाली बजने की आवाज से भड़का आरोपी
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक के पुत्र तिरीत तिग्गा (31 वर्ष), निवासी ग्राम डिडवानारा, ने 30 दिसंबर 2025 को चौकी रैरूमाखुर्द में मर्ग सूचना दर्ज कराई थी। उसने बताया कि उसके पिता राजाराम तिग्गा (65 वर्ष) सुनने में असमर्थ थे। 30 नवंबर 2025 को वे अपने छोटे भाई लुकस तिग्गा के घर से लौट रहे थे।
इसी दौरान बस्ती में आरोपी मुकेन्दर तिग्गा के घर के बाहर थाली बजने की आवाज को लेकर वह अचानक आक्रोशित हो गया। आरोपी घर से बाहर निकला और अपने ही रिश्ते के बड़े पिताजी राजाराम तिग्गा को पकड़कर सड़क पर पटक दिया। इसके बाद उसने लात-घूंसे से बेरहमी से मारपीट की, जिससे बुजुर्ग मौके पर ही बेहोश हो गए।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
घटना के बाद परिजनों ने बीच-बचाव कर घायल बुजुर्ग को उपचार के लिए पहले पत्थलगांव, फिर रायगढ़ और अंबिकापुर के अस्पतालों में भर्ती कराया। बाद में उन्हें पुनः पत्थलगांव अस्पताल ले जाया गया। लंबे इलाज के बावजूद हालत में सुधार नहीं होने पर 28 दिसंबर 2025 को उन्हें घर लाया गया, जहां 29 दिसंबर की दोपहर उनकी मृत्यु हो गई।
हत्या का मामला दर्ज, आरोपी गिरफ्तार
मर्ग जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपी मुकेन्दर तिग्गा पिता धनाराम तिग्गा (22 वर्ष), निवासी ग्राम डिडवानारा, द्वारा किया गया कृत्य हत्या की श्रेणी में आता है। इसके बाद 2 जनवरी 2026 को थाना धरमजयगढ़ में अपराध क्रमांक 01/2026, धारा 103 भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
यह संपूर्ण कार्रवाई पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल के दिशा-निर्देशन एवं एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। मामले की विवेचना और कार्रवाई में चौकी प्रभारी सहायक उप निरीक्षक बृज किशोर गिरी सहित प्रधान आरक्षक लक्ष्मी नारायण केंवट, राम रतनराम तथा आरक्षक भेकलाल सिदार, संतलाल पटेल एवं टीकाराम पटेल की अहम भूमिका रही।



